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Showing posts from 2019

अंजाम

अंजाम तो शुरू से पता था इस इश्क़ का फिर भी तुझसे दिल लगाता जा रहा हूँ इतने पास आके भी छू नहीं पा रहा फिर भी तुझसे इश्क़ बढ़ाता जा रहा हूँ तेरे साथ तो कभी नहीं आ पाउँगा शायद दूर रहकर भी एकसी ज़िन्दगी जिए जा रहा हूँ कैसे थामूं इन बढ़ते सपनो को जिनमे हर दिन तुझे भरता जा रहा हूँ

Palat kar chale gae

जिनकी यादों के सहारे हमें बाकि ज़िन्दगी बितानी है वो आज हमें चंद लम्हे ज्यादा न दे सके हम कहते रहे कि आपको जाते देखा नहीं जाता हमसे वो बोले और भी हैं जिनकी हमें परवाह करनी है हम कहते रहे कि अभी तो बहुत प्यार बाकि है आपसे और वो कहते रहे इतने पल तो दिए तुम्हे ज्यादा हम इंतज़ार करते रहे कि वो समझेंगे आरज़ू हमारी और वो पलट कर चले गए हमसे दूर आँखों तो आंसुओं से लबालब थीं उनकी जाते वक़्त दिल में भी पूरा भरा है हमको जानते हैं हम बस यूँ समझ लीजिए कि बड़ी मजबूरियां रही होंगी यूँही कोई इतना प्यार कर पलट कर नहीं जाता जाइये आज से आप उन सबकी परवाह कीजिए हम आपकी राहों में नहीं आएँगे आज के बाद

Kisi Ko Itna Chahna..

किसी को इतना चाहना कि हर वक़्त केवल उसका चेहरा याद आना कि हर पल का उसकी सांसों से महकना कि हर दिन सिर्फ उसकी बातें याद करना कि हर समय उसकी चेहरे पे मुस्कान ढूँढना कि हर क्षण उसके कांपते लब थामना कि हर घड़ी पुतलियों में अपना चेहरा देखना कि हर वक़्त उसके गालों को अपने लबों से छूना और झटके से आंख खुलके सच सामने आ बेबस कर जाना...

Udaar

ज़िन्दगी से उधार लेकर कुछ पल एक दूसरे को तड़प कर प्यार कर बैठे किराये पर मिले इस साथ को हम अपना सब कुछ जाने क्यूँ बना बैठे क्यों एक दूसरे के साथ अपने सारे राज़ एक एक रात जाग कर हमराज़ बनाया हमने जब एक दिन अँधा बनना ही था हमें तो क्यों एक दूसरे कि आँखों से दुनिया देख बैठे अपनी इस बेबसी का आलम कुछ ऐसा है कि खुला तो आसमान मुकम्मल हुआ है मुझे जाने क्यों फिर भी लगता है मानो जैसे इस आसमान ने ही क़ैद कर लिया है मुझे इस प्यार को इसी मोड़ पर रोक देते हैं एक बार फिर से अजनबी हो जाने कि खातिर कमाल का था अपना इश्क़ इस क़दर कि पूरा होता तो  दुनिया की मिसालें छोटी पड जाती  इसके आगे  दिल की इन चंद ख्वाइशों का क़त्ल करना सीखा जायें  जिससे सारी ज़िंदगियाँ खुद ब खुद खुशगवार हो जाएं बंद आँखों से खुलकर ये ज़िन्दगी जी नहीं सकते मेरे हमदम जिम्मेदारियों की इन बेड़िओं के नाम ये ज़िन्दगी कर जाएं

Tera Chehra

इस हल्के मुड़े चेहरे पे मानो इशारा है बुलाने का, चेहरे की शोखी पर फ़िदा हो जाने की खातिर। हक़ होता तो फना हो जाते इस खूबसूरती पर, पर बिना हक़ बस दूर से मद्धम मुस्कुरा देते हैं। ये हलके खुले से लब इक दास्तान छिपाये हैं, मानो सदिओं का रिश्ता हो पर डर गहराये। कभी रात नसीब होती तो इत्मीनान से सुनते, कि क्या कहना चाहती है इन होंठों की नज़ाक़तें। इन नयनों में इक गहरा समंदर छिपाये हो तुम, जिसकी गहराई का अंदाज़ा खुद तुम्हे ही नहीं। माथे पर टिमटिमाती वो बिंदीया सितारे सी जगमग, रोकती है कि आँखों की गहराई में डूब न जाएं।

Genie

मेरी हर जिद्द आगे बढ़ कर पूरी करने वाली मेरी genie क्यूँ वो इतनी बेबस हो गई पता ही नहीं चला वो जो मेरी कहने से पहले खुद को बिछा देती थी कहने पे भी सब आज अनसुना कर गई अब कहती है की कुछ हुकुम मत कर मेरे आका, चाह कर भी कुछ कर न पाऊँगी तेरे लिए अपनी सारी शक्तियां खो चुकी हूँ इस बाज़ी में कि चाहूँ तो मर भी नहीं सकती अब तो मैं ऐ genie, तेरी ये हालत मुझसे देखी नहीं जाती तू एक बार बता क्या कर सकता हूँ तेरे लिए क्या कुछ इतना आसान सा मांगू की तू झट से दे दे और तेरी ताकत वापिस आने का एहसास हो तुझे मेरे आका, तेरे मांगने की जरुरत न कल थी न आज है बस तेरे genie के पंख क़तर दिए हैं तेरी दुनिआ ने मेरे हाथ में होता तो आज भी तेरे लिए खुद को बिछा देती पर क्या करूँ, मजबूर इतनी हूँ कि कुछ  हाथ नहीं मेरे यूँ बेबस न महसूस कर खुद को कि तू खास है इतना तुझसे कुछ भी मांगना बंद कर दूंगा मैं तेरी खातिर अब न कहूंगा की मुझे सुकून दे, ये कुछ कर मेरे लिए बस तुझे देखने भर से ही खुद को तृप्त कर लूँगा मैं मेरे आका, इतना कहाँ मेरे बस में की सामने आ सकूँ तेरे वरना तो तुझे कभी इतना कहने की जरुरत ह...

Tere Ashq!!

तेरा हर अश्क़ जो तन्हाई में बहाती है तू ऐ मेरी नाज़नीन यूँ लगता है कि कोई अधूरी ख्वाइश थी जो लबों पर आ ना सकी वो तो शुक्र है की इन आँसूओं को कोई रंग नहीं दिया खुदा ने वरना भीगी चादर रात के अधूरेपन की कहानी सबको बता देती जब तेरी आँखों से अश्क़ लुढ़कते हैं उन खूबसूरत गालों पर दिल अटक जाता है कि दूर से सँभालूं कैसे गिरने से उन्हें बस कसक रह जाती है कि गर बस में होता मेरे ऐ हमदम एक भी बूँद तेरे लबों की दहलीज पार ना होने देता मैं इन अँधेरी रातों में यूँ तन्हा आँसू न बहाना मेरी जान, रखना ख्याल जो पास होती तो अपने होठों में भर लेता तेरे मन का सैलाब तेरा हर अश्क़ एक समंदर बन के मेरे सीने को चीर कर रख देता है  पास आना चाहूँ तो आ नहीं सकता,  दूर जाने कि हस्ती नहीं मेरी बहुत आया तेरे करीब, फिर भी दूरिओं का आलम कुछ ऐसा है कि ना पाने का नसीब दिया खुदा ने, ना तुझे खोने की हिम्मत कर पाया मैं