इस हल्के मुड़े चेहरे पे मानो इशारा है बुलाने का,
चेहरे की शोखी पर फ़िदा हो जाने की खातिर।
हक़ होता तो फना हो जाते इस खूबसूरती पर,
पर बिना हक़ बस दूर से मद्धम मुस्कुरा देते हैं।
ये हलके खुले से लब इक दास्तान छिपाये हैं,
मानो सदिओं का रिश्ता हो पर डर गहराये।
कभी रात नसीब होती तो इत्मीनान से सुनते,
कि क्या कहना चाहती है इन होंठों की नज़ाक़तें।
इन नयनों में इक गहरा समंदर छिपाये हो तुम,
जिसकी गहराई का अंदाज़ा खुद तुम्हे ही नहीं।
माथे पर टिमटिमाती वो बिंदीया सितारे सी जगमग,
रोकती है कि आँखों की गहराई में डूब न जाएं।
चेहरे की शोखी पर फ़िदा हो जाने की खातिर।
हक़ होता तो फना हो जाते इस खूबसूरती पर,
पर बिना हक़ बस दूर से मद्धम मुस्कुरा देते हैं।
ये हलके खुले से लब इक दास्तान छिपाये हैं,
मानो सदिओं का रिश्ता हो पर डर गहराये।
कभी रात नसीब होती तो इत्मीनान से सुनते,
कि क्या कहना चाहती है इन होंठों की नज़ाक़तें।
इन नयनों में इक गहरा समंदर छिपाये हो तुम,
जिसकी गहराई का अंदाज़ा खुद तुम्हे ही नहीं।
माथे पर टिमटिमाती वो बिंदीया सितारे सी जगमग,
रोकती है कि आँखों की गहराई में डूब न जाएं।
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