अंजाम तो शुरू से पता था इस इश्क़ का
फिर भी तुझसे दिल लगाता जा रहा हूँ
इतने पास आके भी छू नहीं पा रहा
फिर भी तुझसे इश्क़ बढ़ाता जा रहा हूँ
फिर भी तुझसे दिल लगाता जा रहा हूँ
इतने पास आके भी छू नहीं पा रहा
फिर भी तुझसे इश्क़ बढ़ाता जा रहा हूँ
तेरे साथ तो कभी नहीं आ पाउँगा शायद
दूर रहकर भी एकसी ज़िन्दगी जिए जा रहा हूँ
कैसे थामूं इन बढ़ते सपनो को
जिनमे हर दिन तुझे भरता जा रहा हूँ
दूर रहकर भी एकसी ज़िन्दगी जिए जा रहा हूँ
कैसे थामूं इन बढ़ते सपनो को
जिनमे हर दिन तुझे भरता जा रहा हूँ
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