ज़िन्दगी से उधार लेकर कुछ पल
एक दूसरे को तड़प कर प्यार कर बैठे
किराये पर मिले इस साथ को हम
अपना सब कुछ जाने क्यूँ बना बैठे
क्यों एक दूसरे के साथ अपने सारे राज़
एक एक रात जाग कर हमराज़ बनाया हमने
जब एक दिन अँधा बनना ही था हमें
तो क्यों एक दूसरे कि आँखों से दुनिया देख बैठे
अपनी इस बेबसी का आलम कुछ ऐसा है कि
खुला तो आसमान मुकम्मल हुआ है मुझे
जाने क्यों फिर भी लगता है मानो जैसे
इस आसमान ने ही क़ैद कर लिया है मुझे
इस प्यार को इसी मोड़ पर रोक देते हैं
एक बार फिर से अजनबी हो जाने कि खातिर
दिल की इन चंद ख्वाइशों का क़त्ल करना सीखा जायें
जिससे सारी ज़िंदगियाँ खुद ब खुद खुशगवार हो जाएं
बंद आँखों से खुलकर ये ज़िन्दगी जी नहीं सकते मेरे हमदम
जिम्मेदारियों की इन बेड़िओं के नाम ये ज़िन्दगी कर जाएं
एक दूसरे को तड़प कर प्यार कर बैठे
किराये पर मिले इस साथ को हम
अपना सब कुछ जाने क्यूँ बना बैठे
क्यों एक दूसरे के साथ अपने सारे राज़
एक एक रात जाग कर हमराज़ बनाया हमने
जब एक दिन अँधा बनना ही था हमें
तो क्यों एक दूसरे कि आँखों से दुनिया देख बैठे
अपनी इस बेबसी का आलम कुछ ऐसा है कि
खुला तो आसमान मुकम्मल हुआ है मुझे
जाने क्यों फिर भी लगता है मानो जैसे
इस आसमान ने ही क़ैद कर लिया है मुझे
इस प्यार को इसी मोड़ पर रोक देते हैं
एक बार फिर से अजनबी हो जाने कि खातिर
कमाल का था अपना इश्क़ इस क़दर कि पूरा होता तो
दुनिया की मिसालें छोटी पड जाती इसके आगे
जिससे सारी ज़िंदगियाँ खुद ब खुद खुशगवार हो जाएं
बंद आँखों से खुलकर ये ज़िन्दगी जी नहीं सकते मेरे हमदम
जिम्मेदारियों की इन बेड़िओं के नाम ये ज़िन्दगी कर जाएं
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