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Showing posts from February, 2019

Tera Chehra

इस हल्के मुड़े चेहरे पे मानो इशारा है बुलाने का, चेहरे की शोखी पर फ़िदा हो जाने की खातिर। हक़ होता तो फना हो जाते इस खूबसूरती पर, पर बिना हक़ बस दूर से मद्धम मुस्कुरा देते हैं। ये हलके खुले से लब इक दास्तान छिपाये हैं, मानो सदिओं का रिश्ता हो पर डर गहराये। कभी रात नसीब होती तो इत्मीनान से सुनते, कि क्या कहना चाहती है इन होंठों की नज़ाक़तें। इन नयनों में इक गहरा समंदर छिपाये हो तुम, जिसकी गहराई का अंदाज़ा खुद तुम्हे ही नहीं। माथे पर टिमटिमाती वो बिंदीया सितारे सी जगमग, रोकती है कि आँखों की गहराई में डूब न जाएं।

Genie

मेरी हर जिद्द आगे बढ़ कर पूरी करने वाली मेरी genie क्यूँ वो इतनी बेबस हो गई पता ही नहीं चला वो जो मेरी कहने से पहले खुद को बिछा देती थी कहने पे भी सब आज अनसुना कर गई अब कहती है की कुछ हुकुम मत कर मेरे आका, चाह कर भी कुछ कर न पाऊँगी तेरे लिए अपनी सारी शक्तियां खो चुकी हूँ इस बाज़ी में कि चाहूँ तो मर भी नहीं सकती अब तो मैं ऐ genie, तेरी ये हालत मुझसे देखी नहीं जाती तू एक बार बता क्या कर सकता हूँ तेरे लिए क्या कुछ इतना आसान सा मांगू की तू झट से दे दे और तेरी ताकत वापिस आने का एहसास हो तुझे मेरे आका, तेरे मांगने की जरुरत न कल थी न आज है बस तेरे genie के पंख क़तर दिए हैं तेरी दुनिआ ने मेरे हाथ में होता तो आज भी तेरे लिए खुद को बिछा देती पर क्या करूँ, मजबूर इतनी हूँ कि कुछ  हाथ नहीं मेरे यूँ बेबस न महसूस कर खुद को कि तू खास है इतना तुझसे कुछ भी मांगना बंद कर दूंगा मैं तेरी खातिर अब न कहूंगा की मुझे सुकून दे, ये कुछ कर मेरे लिए बस तुझे देखने भर से ही खुद को तृप्त कर लूँगा मैं मेरे आका, इतना कहाँ मेरे बस में की सामने आ सकूँ तेरे वरना तो तुझे कभी इतना कहने की जरुरत ह...