चेहरे पर स्वर्णिम आभा लिए हुए चांदनी से शांत मुस्कान के साथ जब उसने मुझे देखा तो लगा कि कितनी मासूमियत भरी है इस मुस्कराहट में। एक सुकून है इसके चेहरे पर। इतनी मासूम क्यूँ नहीं रह सकती जिंदगी। सोचते सोचते कुछ विचार मन में आये।
वही कुछ चलते फिरते ख्याल है ये !!
जीवन में सुकून के मायने तलाशता रहा,
हर फिकर को उम्मीदों में डुबाता रहा!
सुकून ने जो न मिलना था, न मिला,
मैं हसरतों के किले गिराता चला गया!
उम्मीद थी कोई इस दिल के दर्द को समझेगा,
इन आरजुओं को बिन कहे ही पूरा कर देगा!
पर यही जाना की ये सिर्फ दिल बहलाने के तरीके है,
जो मिलेगा वो भी तो यही सोचेगा की कोई समझेगा!
बस इस समझ के फेर में फिरकनी हुआ हूँ मैं,
कभी दायें तो कभी बाएं नाचता रह गया हूँ मैं !
समझ नहीं पाया इस समझदारी की समझ को,
समझा ये की सबको पसंद चाबी वाला खिलौना!
जीवन ऐसे ही चला है चलता रहेगा, Shakespeare का कहा नाटक अविराम चलेगा, हमें अपना पात्र अदा करके चले जाना है. चिंता करो तो ये की कही अफ़सोस न करो यूँ न किया होता तो बेहतर होता, क्या पता यूँ न किया होता तो क्या जरुरी है जो हुआ है वही होता?
वही कुछ चलते फिरते ख्याल है ये !!
जीवन में सुकून के मायने तलाशता रहा,
हर फिकर को उम्मीदों में डुबाता रहा!
सुकून ने जो न मिलना था, न मिला,
मैं हसरतों के किले गिराता चला गया!
उम्मीद थी कोई इस दिल के दर्द को समझेगा,
इन आरजुओं को बिन कहे ही पूरा कर देगा!
पर यही जाना की ये सिर्फ दिल बहलाने के तरीके है,
जो मिलेगा वो भी तो यही सोचेगा की कोई समझेगा!
बस इस समझ के फेर में फिरकनी हुआ हूँ मैं,
कभी दायें तो कभी बाएं नाचता रह गया हूँ मैं !
समझ नहीं पाया इस समझदारी की समझ को,
समझा ये की सबको पसंद चाबी वाला खिलौना!
जीवन ऐसे ही चला है चलता रहेगा, Shakespeare का कहा नाटक अविराम चलेगा, हमें अपना पात्र अदा करके चले जाना है. चिंता करो तो ये की कही अफ़सोस न करो यूँ न किया होता तो बेहतर होता, क्या पता यूँ न किया होता तो क्या जरुरी है जो हुआ है वही होता?
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