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Showing posts from September, 2019

अंजाम

अंजाम तो शुरू से पता था इस इश्क़ का फिर भी तुझसे दिल लगाता जा रहा हूँ इतने पास आके भी छू नहीं पा रहा फिर भी तुझसे इश्क़ बढ़ाता जा रहा हूँ तेरे साथ तो कभी नहीं आ पाउँगा शायद दूर रहकर भी एकसी ज़िन्दगी जिए जा रहा हूँ कैसे थामूं इन बढ़ते सपनो को जिनमे हर दिन तुझे भरता जा रहा हूँ