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Showing posts from 2018

Tumhari Ankhon Me

तुम्हारी आँखों में अपने अक्स देखा तो यूँ लगा कि शबनम कि बूदों में मेरा चेहरा छिप गया जैसे तुम्हारे लबों पर आई मुस्कान देखा तो यूँ लगा कि सारी कायनात मुझे मयस्सर हो गई है तू मेरे तसव्वुर से कही ज्यादा खूबसूरत है दिल करता है हर अल्फ़ाज़ में तेरी ही खनक हो इतने इखलास से तुम्हे चाहने लगा हूँ कि जी चाहता है हर पल में सिर्फ तेरा ही दीदार हो फितूर इस कदर है तू मेरा की दिल भरता ही नहीं तुझमे फना होना चाहूँ पर तू कहाँ मयस्सर है मुझे कैसे माप सकता हूँ पैमाने से तेरे मेरे इश्क़ को ये इश्क़ बेवजह है कि हमेशा से ख्वाब है तू मेरा हमेशा ख्वाब ही थी तू मेरा, आज भी वही है पर सुकून ही इतना है मिलने में कि रहा नहीं जाता ख्वाइश है कभी वो सेहर हो जिसमे तू साथ हो मेरे तेरे दीदार को तरस कल भी थी, आज भी है। 

Ye Kya Ham Kar Baithe

प्यार की तलाश में ये क्या मोड़ ले लिए हमने जिस गली ना जाना था उस गली हम जा बैठे उस महबूबा की तलाश में जाने कहाँ आ गए हम हसरतों के अनगिनत किले जाने कब बना हम बैठे तेरा पैगाम मेरे हमदम ना आना था ना आया फिर क्यूँ उसके इंतज़ार में चिराग हम जला बैठे बस तेरे अक्स के दीदार को तड़पते हैं अब जाने कब तेरे प्यार में खुद को भुला हम बैठे ख्वाइश थी गुलमोहर से एक बार मिलने की पर जाने कब गुलमोहर के ही हम हो बैठे तू ना ही कभी मिलनी थी ना ही मिली हमें फिर क्यूँ अपना वजूद तुझमें मिटा हम बैठे ऐ गुलमोहर, काश कभी तेरे छाँव में सुकून हम पाते  पर देख जाने कैसे खुद को तुझपे फ़ना हम कर बैठे  

Aur Koi..

कोई प्यार की हद बनाता रह गया, और कोई बेहद प्यार कर गया । कोई सब पाकर भी अधूरा रह गया, और कोई सब खोकर भी पूरा हो गया ।  कोई तन्हाई की वजह ढूंढता रह गया, और कोई तन्हाई में एक जीवन जी गया। ------------------------------------------ अलविदा इस रिश्ते की नियति थी शुरुआत से तो क्यूँ  दिल दुखता है दूर जाने की बात से ------------------------------------------

Kun Hai?

प्यार का इज़हार भी है और इक़रार भी, फिर दूरिओं की ये दीवार क्यूँ हैं? ये परिंदे तो ऊँची उड़ान भरना जानते हैं, फिर पंखों में ये बेड़ियां क्यूँ हैं? दिल तो धड़कता है इक दूजे के लिए, फिर हसरतों पर ये जकड़न क्यूँ हैं? सांसों की गर्मी में एकसी महक है , फिर दीदार को ये इंतज़ार क्यूँ हैं? हसरतें तो साथ में आसमान छूने की हैं, फिर चेहरे पर ये इंकार क्यूँ हैं? -------------------------------------------- pyar ka izhar bhi hai aur iqrar bhi phir durion ki ye deewar kun hai? ye parinde to udna bhi jante hain, par pankhon me ye bedian kun hai? dil to dhadakta hai ek duje ke lie. phir hasraton par ye jakdan kaisi hai? sanson ki garmi me eksi mahak hai, phir deedar ko ye intezar kun hai? hasratein to sath me asman chune ki hain, phir chehre pe ye inkaar kun hai?