हाथों में जाम, एक हसीं शाम, छलकता प्याला, और सामने हुश्न का बेशकीमती नगमा। उस अनामिका अप्सरा के नाम कुछ पंक्तियाँ अर्ज़ हैं: अब ये अक्स अनजान नहीं रहा उसका नाम भी है और एक चेहरा भी बहुत ही मद्धम है उसका एहसास इन आँखों में डूबने की इजाजत दे दे मुझे कि ख्वाइश मेरी कहीं अधूरी न रहे इन लबों का एक स्पर्श मिल जाये तो जीवन में फरमाइश कोई बाकि न रहे अभिलाषा है तुझे देखा करें हम दिन रात दूरी की हमारे बीच कोई गुंजाईश न रहे इस शाम को यादगार कर दे, आजा इतने करीब कि नज़दीकी की कोई हद बाकि न रहे तेरे मासूम लबों की सरसराहट ने मानो जैसे मार ही डाला है मुझे एक बार टूट कर बाँहों में भर ले कि इंतज़ार की ज़रूरत बाकि न रहे इस कायनात की सारी खूबी समायी है तेरे सूरत में एक बार पलकों से छू ले की दिल की ख्वाइश पूरी हो जाये लग जा गले ऐ हमदम की मिलने की महक सदा दिल में महकती रहे इस शाम, छू ले लब मेरे कि इस शाम में कसक कोई बाकी न रहे --- Hathon mein jamm, ek haseen shaam, chalakta pyala, aur samne husn ka beshkeemti nagma.. us anamika apsara ke naam kuch panktian arz hain.. Ab ye aks ...
'Pratibimb' means image. Image of mind, soul and feelings. It is about the world, the wild, the live, the dead. It is about me and you.